Sunday, March 11, 2012

मैंने तुमको देखा

मैंने तुमको देखा,
देख के कुछ हुआ,
क्या हुआ, कैसे हुआ,
जानने की जरूरत नहीं,
क्यूंकि मुझे भी नहीं पता|

तुम cute हो,
स्टाइल भी मार लेती हो ठीक ठाक,
इसलिए तुम्हारा मुझे hot लगना,
कोई rare event नहीं था|

But, था तो ये एक accident ही,
सच बताओ, क्या मेरे सिवा,
किसी और ने कभी लाइन मारी है तुम्हें?
मुझे क्या पता था,
आगे मेरी लगनी वाली है,
खैर सुनो! कैसे लगी|

लव चरित मानस के अध्यायों की भांति,
मै chapter by chapter,
Standard mistakes करता गया,
मेरा तुम्हें coffee पे invitation देने के पहले ही,
तुमने उसे pre-empt करते हुए,
Summarily reject कर दिया|

Corridor से गुजरते हुए जब मैंने
नज़रें ऊपर उठा के, तुम्हारा दीदार किया,
तो मुझे वैसे सुकून की अनुभूति हुई,
मानो India को UNSC की permanent membership मिल गयी हो|

किसी न किसी बहाने से,
I came to your seat,
पर तुमने 'I am busy' & 'What do you want?' जैसे bouncer,
दनादन मुझपे throw kar diye|

मैंने सोचा ठीक है चलो,
तुम्हें boys के साथ date करना पसंद नहीं,
तुम शालीन, सुल्ल्जिनी, girls only के साथ hangout करने वाली,
Simple girl होगी |

परन्तु जब मैंने उस दिन काल वर्णी, fatty dude के साथ तुम्हें देखा,
तो मुझे समझ में आ गया कि तुम,
stock market की वो equity share हो,
जिसके movements को predict करना,
मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है|

Hottie (No, No, you are not so much)
Dear (Hmm, what have you done to be so?)
Miss (Haan, this is ok), अपनी हरकतों से तुमने मुझे इतना आतंकित कर दिया है,
कि तुम्हारे बारे में सोचते ही दिल में टन टना टन की जगह,
दन दनादन होने लगी है|

मैंने सोचा कि कुछ नहीं - ये तुम्हारी अदा होगी,
दिल ही दिल में तुम भी मुझ पे फ़िदा होगी,
और मन में ऐसा विश्वास लेकर,
Numerology के हिसाब से,
अपने और तुम्हारे birth dates को match करके Fit होने वाले दिन,
मैंने तुम्हें ये बोल डाला,
हाँ, वोही - Oldish, Creepish, Cliche sentence,
जिसका भावार्थ था – प्रिये मै तुम्हारे स्नेह एवं सौंदर्य की छाँव में,
अपने जीवन की Mattress बिछाना चाहता हूँ|

लेकिन करुणा, आर्द्रता, सहिष्णुता, स्नेह व प्रेम जैसे भाव,
तुम्हारे हृदय पटल से उतने ही दूर हैं,
जितना की Islamic Republic of Pakistan से Democracy,
और इसीलिए तुमने मेरा प्रेम प्रवाच सुनकर मेरी ऐसी धुलाई की,
कि आज भी तुम्हारे कर्कश शब्दों की non-stop firing,
मेरे दिल-ओ-दिमाग के borderless territory में होती है|

अब क्या ही कहूं? और कैसे कहूं?
करूँ भी तो क्या?
तुम्हें भुला पाना आसान नहीं और तुम्हें पाना,
Dawood Ibrahim को India लाने जैसा है|

मेरा क्या होगा dear - I don't have any clue,
लगता तो ऐसा है कि I am screwed and gone,
But when I think with my cool head,
I see it and
See it clearly,
कि आने वाले समय का होने वाला ये नारा है,
Sweeto! कटा मेरा नहीं, कटा तुम्हारा है|
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Based on a work at chaitanya-insearch.blogspot.com.