Monday, February 13, 2017

बेसब्री

कह न सके हम, ये मेरी सांसों की सच्चाई है,
तू है तो रब है, वरना जीना रुसवाई है|

तुम्हें भूलते भी हैं, तो फिर याद करने को,
तेरी चाहत, मेरे वजूद की रानाई है|

एक मुद्दत हो गए, आपके दीदार को,
बहार मेरे कूचे में, इस बरस भी नहीं आई है|

ये जो फासले हैं, मेरे और तेरे दरमियाँ,
आगे बढ़ो तो वस्ल है, बैठे रहो तो खाई है|

ढूंढते हो आशियाँ, यूँ ही दर-ब-दर,
तुम्हारा मकां तो, मेरे दिल की गहराई है|

हिज्र के लम्बी रात की, आखिर कब होगी सहर?
आ भी जाओ अब, बेताब हसरतों ने ली अंगड़ाई है|

कुछ मेरी खता होगी, कुछ तेरी गलतियाँ,
ये है इश्क की मुश्किलें, नहीं किसी की बेवफाई है|



शब्दार्थ: रब - God, रुसवाई - Disgrace, रानाई - Beauty, दीदार - Sight, कूचा – Street, वस्ल - Union of lovers, आशियाँ - House, दर-ब-दर – Door to door, हिज्र – Separation, सहर – Morning, हसरतों - Desires, बेताब – Impatient, खता – Mistake  

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