Wednesday, March 10, 2010

जीवन

जीवन यदि प्राची से उदित दिवाकर की आभायुक्त रश्मियों की भांति लालिमा युक्त व उद्भासित है, वहीं तुषार के धुंधलके में छिपा कोई रहस्यात्मक आवरण है.

जीवन की विभिन्न अनुभूतियाँ मनुष्य के अन्तरतर में विभिन्न रंगों का प्रवाह उसी प्रकार कराती हैं यथा विभिन्न रंग विन्यासों में अंकित कोई चित्र विभिन्न कोणों से भिन्न भिन्न बिम्बों को धारण करता है!

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