Monday, June 29, 2009

चिंतन

संगीत-एक अनन्य भावबोध!
यथार्थ की परिकल्पना या अंतर्मन की अनपहचानी वेदना,
रचना - शब्दों का क्रमचय -संचय, भावों की उधेड़बुन!
शब्दों का भाव पर अधिपत्य या,
भावों का शब्दों की भूमि पर उन्मुक्त प्रवाह,
स्मृति-एक पुरातन भावमय बिम्ब!
अतीत की पुनर्रचना या
वर्तमान की पीठिका पर भूत का प्रत्यावलोकन?

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This work by Chaitanya Jee Srivastava is licensed under a Creative Commons Attribution-Noncommercial-No Derivative Works 2.5 India License.
Based on a work at chaitanya-insearch.blogspot.com.